राजनीति विज्ञान MA Political Science Notes in Hindi PDF

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आज हम M. A. के विद्यार्थियों के लिए राजनीति विज्ञान नोट्स पीडीएफ लेकर आए हैं जिसमें आपको सभी महत्वपूर्ण टॉपिक पर जानकारी दी गई है और परीक्षा के माध्यम से यह वीडियो आपके लिए बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होने वाला है तो डाउनलोड करने के बाद यह MA Political Science Notes PDF in Hindi को जरूर एक बार पूरा पढ़े। 

🔖 PDF NameMA Political Science Notes in Hindi PDF
🗣️ LanguageHindi
📖 No. of Pages298
📔 PDF Size13MB
📚 CategoryHindi Notes
⭐ QualityHD Quality
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MA Political Science Notes in Hindi PDF

MA राजनीति विज्ञान में अध्ययन करने के लिए एक उत्कृष्ट विषय है जो समाज, राजनीति और सरकारी प्रक्रियाओं के बीच संबंध का अध्ययन करता है। यह एक विस्तृत क्षेत्र है जो विभिन्न राजनीतिक विषयों पर विचार करता है, जैसे कि शासन, राजकीय व्यवस्था, विधायिका, नीतियाँ, राजनीतिक संघर्ष, भारतीय राजनीति, आंतर्राष्ट्रीय संबंध, लोकतंत्र, समाजशास्त्र आदि।
राजनीति विज्ञान के विभिन्न मुद्दे और समस्याओं पर लिखे गए लेखों ने विश्व के राजनीतिक मंच पर बदलाव का सामना किया है। यह एक नई सोच और समझ को विकसित करता है जो समाज के सभी पहलुओं को समझने में मदद करता है।
राजनीति विज्ञान के अध्ययन से समाज के लोग राजनीतिक विकास और बदलाव को समझने के साथ-साथ नई नीतियों और नीति निर्माण में भागीदारी भी कर सकते हैं। इसके माध्यम से लोग देश के संविधान, विधायिका, न्यायपालिका, सरकारी नीतियों आदि को समझते हैं और सकारात्मक बदलाव को प्रोत्साहित करते हैं।
राजनीति विज्ञान के अध्ययन से विद्यार्थियों को राजनीतिक प्रक्रियाओं के बारे में जागरूक बनाया जाता है जो उन्हें समाज के भलाई के लिए सकारात्मक परिवर्तन करने में मदद करता है।
यहां कुछ प्रमुख विषयों पर राजनीति विज्ञान से संबंधित लेखों के उदाहरण दिए गए हैं:

1 “लोकतंत्र और चुनाव प्रक्रिया”
2 “भारतीय राजनीति में जाति और धर्म”
3 “नगरीय शासन में पार्टिसिपेशन का महत्व”
4 “भारत-पाकिस्तान संबंध: समस्याएं और समाधान”
5 “नागरिक स्वतंत्रता आंदोलन और उसका प्रभाव”



इन लेखों में राजनीति विज्ञान के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया जाता है और उन्हें विवेचना के लिए प्रेरित किया जाता है। ये लेख राजनीति विज्ञान के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण संसाधन हैं जो विभिन्न सामाजिक विषयों पर विचार करते हैं और समाज के समृद्धि के लिए सकारात्मक परिवर्तन करने की कला को समझाते हैं।

1.लोकतंत्र और चुनाव प्रक्रिया

लोकतंत्र और चुनाव प्रक्रिया दोनों ही राजनीति विज्ञान के अहम विषय हैं, जो लोगों को अपने राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के माध्यम से शासन के नेता का चयन करने में मदद करते हैं। यह दोनों विषय एक-दूसरे के साथ गहरे संबंध में होते हैं, क्योंकि चुनाव प्रक्रिया लोकतंत्र का मूल तत्व है और इसमें नागरिकों का अधिकार है अपने नेता का चयन करने का।
लोकतंत्र का अर्थ है “लोगों की शासन” और यह एक ऐसी राजनीतिक व्यवस्था है जिसमें शक्ति लोगों के हाथ में होती है। इसमें नागरिकों को चुनाव के माध्यम से अपने नेता का चयन करने का अधिकार होता है और वे सरकारी निर्णयों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। लोकतंत्र विश्व में सबसे व्यापक रूप से अपनाया जा रहा शासन व्यवस्था है। इसमें नागरिकों की भागीदारी, मुकाबला, और विभिन्न राजनीतिक दलों की विकल्पों के बीच प्रतिस्पर्धा होती है।
चुनाव प्रक्रिया लोकतंत्र का एक अहम तत्व है, जिसमें नागरिकों को निर्दिष्ट समय-सीमा में नए नेता चुनने का मौका मिलता है। यह एक प्रक्रिया है जिसमें नागरिक अपने वोट के माध्यम से अपने पसंदीदा उम्मीदवार को चुनते हैं, जो उन्हें सरकार में वक्तव्य संख्या के रूप में प्रतिनिधित्व करेगा। चुनाव प्रक्रिया एक न्यायिक, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रक्रिया है जो नागरिकों को नया नेतृत्व चुनने में सक्षम बनाती है।
चुनाव प्रक्रिया के दौरान, उम्मीदवार अपनी योजनाएं और नीतियां प्रस्तुत करते हैं, और नागरिक उन्हें अपनी पसंदीदा विकल्प के रूप में चुनते हैं। चुनाव प्रक्रिया में ईमानदारी, निष्ठा और विश्वासयोग्यता के लिए मुख्यता रखी जाती है। चुनावी प्रक्रिया के नतीजे में सबसे ज्यादा मतों को प्राप्त करने वाले उम्मीदवार को नेता बनाया जाता है और वह सरकार में सत्ता संभालता है।
इस प्रकार, लोकतंत्र और चुनाव प्रक्रिया नागरिकों को राजनीतिक शक्ति देते हैं और उन्हें सरकारी निर्णयों में सक्रिय भागीदार बनाते

2.भारतीय राजनीति में जाति और धर्म

भारतीय राजनीति में जाति और धर्म दो अहम और चिरंतन विषय हैं, जो भारतीय समाज और राजनीतिक प्रक्रियाओं को गहरे संबंधों में बांधते हैं। ये विषय भारतीय राजनीति में अपने विचार, नीतियों, और संरचना पर गहरा प्रभाव डालते हैं।
जाति: भारतीय समाज में जाति एक प्रमुख और प्राचीन समाजिक वर्गीकरण प्रणाली है। जाति आधारित समाज में लोगों को उनके जन्मांतर के आधार पर विभाजित किया जाता है। यह विभाजन विभिन्न समाज और संस्कृति में भिन्न-भिन्न तरीकों से होता है, जिससे लोग अपनी समाजिक पहचान के अनुसार जीवन व्यतीत करते हैं। जाति भारतीय राजनीति में राजनीतिक दलों के गठबंधन और वोट बैंकिंग के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनती है। राजनीतिक दल जाति आधारित मतदाताओं को प्राप्त करने के लिए जाति विरोधी या जाति आधारित नीतियों का प्रयोग करते हैं। जाति आधारित राजनीति समाज में एकता और सहयोग को भंग कर सकती है और विभाजन का कारण बन सकती है।
धर्म: धर्म भारतीय समाज में एक महत्वपूर्ण तत्व है और भारतीय राजनीति के भीतर भी एक अभिन्न अंश बना रहता है। धर्म की भूमिका भारतीय राजनीति में बहुत महत्वपूर्ण है, और राजनीतिक दलों के धर्माधारित मतदाता पर असर पड़ती है। भारतीय राजनीति में धर्म के मुद्दे जैसे कि धार्मिक समुदायों के संरक्षण, धार्मिक स्थलों की सुरक्षा, धर्मनिरपेक्षता, धार्मिक संस्थानों के दायित्वों का विकास आदि राजनीतिक बहस का विषय बनते हैं।
भारतीय राजनीति में जाति और धर्म के मुद्दे विवादास्पद होते हैं और राजनीतिक दल इन विषयों पर भागीदारी को देखते हुए अपनी नीतियों को तैयार करते हैं। यह मुद्दे समाज में विभाजन और एकता का भी कारण बन सकते हैं और भारतीय राजनीति के लिए चुनौती प्रदान कर सकते हैं। इन मुद्दों का समाधान धैर्य से, सभी तरीकों से समझाने और समाधान के लिए सामंजस्यपूर्ण दृष्टिकोण र

3.नगरीय शासन में पार्टिसिपेशन का महत्व

नगरीय शासन में पार्टिसिपेशन (सहभागिता) का महत्व विशेष रूप से समाज के समृद्धि और सुस्थिति के लिए होता है। नगरीय शासन उस संरचना को संदर्भित करता है जिसमें स्थानीय स्तर के संस्थान और नागरिक संगठनों के माध्यम से नागरिकों को सरकारी निर्णयों में भाग लेने का अधिकार और बदलाव करने की सुविधा मिलती है।
नगरीय शासन में पार्टिसिपेशन का महत्व निम्नलिखित कारणों से होता है:
सशक्तिकरण: पार्टिसिपेशन नागरिकों को सशक्त बनाता है, जिससे उन्हें अपने समूह के विकास और प्रगति में सक्रिय रूप से भागीदारी करने की अनुमति मिलती है। यह नागरिकों को अपने समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी प्रतिनिधित्व में भाग लेने की क्षमता प्रदान करता है और समाज के विकास के लिए उनके आवश्यकताओं का सम्मान करता है।
न्यायपालिका और पारदर्शिता: पार्टिसिपेशन न्यायपालिका को सुदृढ़ करता है और सरकारी प्रक्रिया में पारदर्शिता को बढ़ाता है। जब नागरिक सरकारी निर्णयों में सक्रिय रूप से शामिल होते हैं, तो सरकार को उनके आवश्यकताओं का सम्मान करने और उन्हें न्यायपूर्वक निर्णय लेने के लिए प्रेरित करता है।
सामाजिक समरसता: नागरिक संगठनों और स्थानीय स्तर के संस्थानों के माध्यम से नागरिक समरसता बढ़ती है। यह सभी वर्गों के लोगों को समान रूप से संदर्भित करता है और उन्हें समाज में भागीदारी का अधिकार देता है। यह सामाजिक असमानता और भेदभाव को कम करने में मदद करता है और समाज में सामंजस्यपूर्ण विकास को प्रोत्साहित करता है।
सार्वजनिक नीतियों का संचार: नागरिक संगठनों और स्थानीय स्तर के संस्थानों के माध्यम से सरकारी नीतियों का संचार होता है। इससे नागरिकों को सरकार के फैसलों और कार्यक्रमों के बारे में जानकारी मिलती है और वे अपने मतदान को समझते हैं। सार्वजनिक नीतियों का संचार सुनिश्चित करता है कि नागरिकों के विचारों को समझा जाता है और उनके विकास के लिए उचित कदम उठाए जाते ह

4.भारत-पाकिस्तान संबंध: समस्याएं और समाधान


भारत-पाकिस्तान संबंध विश्व के एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय हैं। दोनों देशों के बीच संबंधों में कई समस्याएं हैं, जो इन संबंधों को कठिन बना रही हैं। इसे एक समझदारी, संवेदनशीलता और आपसी सहयोग से समाधान किया जा सकता है।
कुछ मुख्य समस्याएं और समाधान निम्नलिखित हैं:
सीमा विवाद: भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा विवाद एक पुरानी मुद्दा है। कश्मीर मसले के कारण सीमा विवाद अब तक हल नहीं हुआ है। समाधान के लिए दोनों देशों को संवेदनशील बातचीत और मध्यस्थता तंत्र का उपयोग करना होगा। दोनों देशों के बीच निश्चित सीमा रेखा का निर्धारण और सम्माननीय समझौता करने से सीमा विवाद का समाधान संभव है।
आतंकवाद: भारत और पाकिस्तान के बीच आतंकवाद का मुद्दा भी एक बड़ी समस्या है। आतंकवादी समूहों का उपयोग दोनों देशों के बीच संबंधों को खराब करने के लिए होता है। इसे रोकने के लिए भारत और पाकिस्तान को साझा विरोधीता और सामर्थन करना चाहिए। दोनों देशों को आतंकवाद से संभंधित खुफिया सूचना विनिमय में सक्रिय होना चाहिए।
वाणिज्यिक संबंध: वाणिज्यिक संबंध भारत और पाकिस्तान के बीच अभी भी बहुत सीमित हैं। व्यापार, विनियमन और आर्थिक संबंधों को समृद्धि के लिए बढ़ाने के लिए दोनों देशों को साझा प्रयास करना चाहिए। आर्थिक सहयोग और व्यापार के विकास से दोनों देशों को लाभ होगा और यह संबंधों को मजबूत बनाएगा।
लोगों के विमान और अवारा हिंसा: भारत और पाकिस्तान के बीच लोगों के विमान और अवारा हिंसा का मुद्दा भी एक चिंता का विषय है। दोनों देशों को सम्माननीय यातायात सुनिश्चित करने के लिए बढ़िया संरचना और मदद का प्रदान करने से यह समस्या हल हो सकती है।
भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों को समझदारी से संभाला जाना चाहिए और समस्याओं का समाधान सभी के लिए लाभकारी होना चाहिए। विचारशील सामर्थ


5.नागरिक स्वतंत्रता आंदोलन और उसका प्रभाव


नागरिक स्वतंत्रता आंदोलन भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण चरण था, जिसने देश की आजादी के लिए अथक प्रयास किए गए थे। यह आंदोलन अंग्रेजी शासन के खिलाफ नागरिकों के संघर्ष, संगठन, और आन्दोलनों का संग्रह था जिसमें विभिन्न नेतृत्वकर्ताओं और संगठनों ने भारतीय स्वतंत्रता के लिए अपना योगदान दिया।
नागरिक स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख प्रभाव:
जनसमर्थन: यह आंदोलन ने जनसमर्थन का संचार किया और भारतीय नागरिकों को राष्ट्रीय चेतना और एकीकरण के प्रति प्रोत्साहित किया। लोगों में जागरूकता बढ़ी और वे अपने देश की स्वतंत्रता के लिए एकजुट हो गए।
सत्याग्रह: महात्मा गांधी जैसे महान नेता ने नागरिक स्वतंत्रता आंदोलन में सत्याग्रह का प्रचार-प्रसार किया। यह असाधारण नागरिकों के अहिंसा, सत्य, और अधिकारों के लिए संघर्ष के रूप में प्रस्तुत हुआ।
संघर्ष और त्याग: आंदोलन में भारतीय नेता और नागरिकों ने अपने अधिकारों के लिए संघर्ष किया और त्याग दिया। वे अपने देश की स्वतंत्रता के लिए सभी आर्थिक, सामाजिक, और राजनीतिक अभावों का सामना करते हुए अपने जीवन का बलिदान किया।
राष्ट्रीय एकता: नागरिक स्वतंत्रता आंदोलन ने भारतीय समाज में राष्ट्रीय एकता का माहौल पैदा किया। भारतीय लोग भारतीय स्वतंत्रता के लिए सामूहिक रूप से संघर्ष करते हुए विभिन्न समस्याओं का सामना करने लगे और एक साथ काम करने लगे।
अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव: नागरिक स्वतंत्रता आंदोलन ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अपना प्रभाव डाला। विभिन्न देशों के लोग भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के प्रति समर्थन प्रकट करते हुए भारतीयों के साथ खड़े हुए।
नागरिक स्वतंत्रता आंदोलन ने भारतीय समाज को स्वतंत्रता और समरसता की ओर अग्रसर किया। यह आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता के प्राप्ति में अनमोल योगदान देने वाला एक महत्वपूर्ण अध्याय है।

★ भारतीय संवैधानिक इतिहास की मुख्य घटनाये :-
1. रेग्युलेटिंग एक्ट 1773
2. पिट्स इंडिया एक्ट 1784
3. चार्टर एक्ट 1793
4. चार्टर एक्ट 1813
5. चार्टर एक्ट 1833
6. चार्टर एक्ट 1853
7. भारत सरकार अधिनियम 1858
8. भारत परिषद अधिनियम 1861
9. भारत परिषद अधिनियम 1892
10. मार्ले मिण्टो सुधार अधिनियम 1909
11. भारत शासन अधिनियम 1919
★ संविधान सभा
★ संविधान निर्माण
★ अनुसूचियां
★ संविधान के स्रोत
★ प्रस्तावना
★ मूल अधिकार
★ नीति निर्देशक तत्व
★ मूल कर्तव्य
★ संसदीय शासन प्रणाली
★ उच्च न्यायालय
★ अधीनस्थ न्यायालय
★ राष्ट्रपति
★ प्रधानमंत्री
★ संविधान की विशेषतायें
★ संविधान संसोधन
★ लोक सभा
★ राजनीतिक दल
★ राज्यपाल
★ मुख्यमंत्री व मंत्रिमंडल
★ राज्य सचिवालय
★ मानवाधिकार आयोग
★ राजस्थान लोकसेवा आयोग

MA Political Science Notes in Hindi PDF

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S. No.Chapters Name
1.अंतर्राष्ट्रीय संबंध, समस्याएं एवं सिद्धांत
2.भारत: लोकतंत्र एवं विकास
3.आस्ट्रेलिया की विदेश नीति
4.तुलनात्मक राजनीति : मुद्दे और प्रवृत्तियाँ
5.राजनीतिक सिद्धांत
6.भारत एवं विश्व
7.लैटिन अमेरिका में राज्य एवं समाज
8.पश्चिमी राजनीतिक चिंतन
9.आधुनिक भारत में सामाजिक एवं राजनीतिक विचार
10.अफ्रीका में राज्य और समाज
11.शांति एवं विवाद अध्ययन
12.भारत में राज्यीय राजनीति
13.शोध निबंध
14.वैश्विक मामलों में यूरोपीय दृष्टि
15.आस्ट्रेलिया में राज्य एवं समाज

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